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तीन गुण से जुड़े सभी प्रश्न(3)

तीन गुण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव अस्त्र-शस्त्र

त्रिशूल में तीन शिर क्यों होते हैं

त्रिशूल के तीन शिर तीन गुण (सत्व-रज-तम), तीन काल (भूत-वर्तमान-भविष्य), तीन ताप (दैहिक-दैविक-भौतिक) और तीन लोकों पर शिव की सर्वाधिकार-शक्ति के प्रतीक हैं।

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प्रकृति तत्त्व

तीन गुणों वाली प्रकृति कैसी होती है?

तीन गुणों वाली प्रकृति रक्तवर्णा रजोगुणवाली, शुक्लवर्णा सत्त्वगुणवाली और कृष्णवर्णा तमोगुणवाली बताई गई है।

#तीन गुण#प्रकृति#रजोगुण
शिव की प्रमुख लीलाएं

त्रिपुरासुर वध का दार्शनिक अर्थ क्या है?

तीन पुरियाँ = तीन गुण (सत्त्व, रज, तम) या तीन शरीर (स्थूल, सूक्ष्म, कारण) के अहंकार का प्रतीक। जब तक ये योग अवस्था में एक सीध में न आएं — शिव का ज्ञानरूपी बाण इस अहंकार को नष्ट नहीं कर सकता।

#त्रिपुरासुर दार्शनिक अर्थ#तीन गुण#तीन शरीर
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