विस्तृत उत्तर
दार्शनिक दृष्टि से ये तीन पुरियां (त्रिपुर) मनुष्य के तीन गुणों (सत्त्व, रज, तम) या तीन शरीरों (स्थूल, सूक्ष्म, कारण) के अहंकार का प्रतीक हैं।
जब तक ये तीनों एक सीध में (योग अवस्था में) नहीं आते, तब तक शिव का ज्ञानरूपी बाण इस अहंकार को नष्ट नहीं कर सकता।





