तीर्थप्रयागराज संगम स्नान का विशेष महत्व?प्रयागराज=तीर्थराज। त्रिवेणी(गंगा+यमुना+सरस्वती), ब्रह्मा प्रथम यज्ञ, अक्षयवट। संगम स्नान=करोड़ पुण्य। माघ/कुंभ=विशेष। पिंडदान=गया समान।#प्रयागराज#संगम#त्रिवेणी
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रयाग तीर्थराज में माघ मेले का क्या महत्व बताया गया रामचरितमानस में?तुलसीदासजी ने संत-समाज को चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग कहा। रामभक्ति = गंगा, ब्रह्मविचार = सरस्वती, कर्मकथा = यमुना। यह तीर्थराज अलौकिक है और तत्काल फल देने वाला है।#बालकाण्ड#प्रयाग#माघ मेला
तीर्थ एवं धामप्रयागराज का माहात्म्य क्या है?प्रयागराज 'तीर्थराज' है — यहाँ ब्रह्माजी ने प्रथम यज्ञ किया, गंगा-यमुना-सरस्वती का त्रिवेणी संगम है, और समुद्र मंथन के अमृत की बूंदें गिरने से कुंभ मेला लगता है। माघ में यहाँ स्नान दस हजार तीर्थों के समान फलदायी है।#प्रयागराज#तीर्थराज#संगम