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रामचरितमानस — बालकाण्ड⏱ 1 मिनट पठन

प्रयाग तीर्थराज में माघ मेले का क्या महत्व बताया गया

तुलसीदासजी ने संत-समाज को चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग कहा। रामभक्ति = गंगा, ब्रह्मविचार = सरस्वती, कर्मकथा = यमुना।

संक्षिप्त उत्तर

तुलसीदासजी ने संत-समाज को चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग कहा। रामभक्ति = गंगा, ब्रह्मविचार = सरस्वती, कर्मकथा = यमुना। यह तीर्थराज अलौकिक है और तत्काल फल देने वाला है।

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विस्तृत उत्तर

बालकाण्ड में प्रयाग तीर्थराज और माघ मेले का बड़ा महत्व बताया गया है। तुलसीदासजी ने संत-समाज की तुलना तीर्थराज प्रयाग से की।

चौपाई — 'मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू। राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा॥'

अर्थ — संतोंका समाज आनन्द और कल्याणमय है, जो जगतमें चलता-फिरता तीर्थराज (प्रयाग) है। जहाँ (उस संतसमाजरूपी प्रयागराजमें) रामभक्तिरूपी गंगाजीकी धारा है और ब्रह्मविचारका प्रचार सरस्वतीजी हैं।

इसमें प्रयाग की तीन नदियों की उपमा दी:

  • ▸गंगा = रामभक्ति
  • ▸सरस्वती = ब्रह्मविचार का प्रचार
  • ▸यमुना = विधि-निषेधमय कर्मकथा जो कलियुग के पापों को हरने वाली है

साथ ही कहा — 'अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ॥' — वह तीर्थराज अलौकिक और अकथनीय है, तत्काल फल देनेवाला है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

प्रयाग तीर्थराज में माघ मेले का क्या महत्व बताया गया रामचरितमानस में को संदर्भ सहित समझें

प्रयाग तीर्थराज में माघ मेले का क्या महत्व बताया गया रामचरितमानस में का सबसे सीधा सार यह है: तुलसीदासजी ने संत-समाज को चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग कहा। रामभक्ति = गंगा, ब्रह्मविचार = सरस्वती, कर्मकथा = यमुना। यह तीर्थराज अलौकिक है और तत्काल फल देने वाला है।

रामचरितमानस — बालकाण्ड जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर
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