रामचरितमानस — बालकाण्डप्रयाग तीर्थराज में माघ मेले का क्या महत्व बताया गया रामचरितमानस में?तुलसीदासजी ने संत-समाज को चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग कहा। रामभक्ति = गंगा, ब्रह्मविचार = सरस्वती, कर्मकथा = यमुना। यह तीर्थराज अलौकिक है और तत्काल फल देने वाला है।#बालकाण्ड#प्रयाग#माघ मेला
रामचरितमानस — बालकाण्डयाज्ञवल्क्यजी और भरद्वाजजी का मिलन किस अवसर पर हुआ?माघ मेले (मकर स्नान) के अवसर पर प्रयाग में। हर वर्ष माघ महीने में मुनिगण प्रयाग आकर स्नान करते और लौट जाते। एक बार भरद्वाजजी ने याज्ञवल्क्यजी के चरण पकड़कर उन्हें रोक लिया।#बालकाण्ड
तीर्थ एवं धामप्रयागराज संगम पर स्नान कब करें?प्रयागराज संगम में कभी भी स्नान किया जा सकता है, लेकिन माघ मास विशेष है। सबसे महत्वपूर्ण स्नान तिथियाँ हैं — मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि। हर 12 वर्ष में कुंभ और 144 वर्षों में महाकुंभ का विशेष महत्व है।#प्रयागराज#संगम स्नान#माघ मेला