शिव अस्त्र-शस्त्रत्रिशूल के तीन बिंदुओं का क्या अर्थ है शिव पुराण मेंत्रिशूल के तीन शूल — तीन गुण (सत-रज-तम), तीन काल (भूत-भविष्य-वर्तमान), तीन ताप (दैहिक-दैविक-भौतिक) और तीन लोकों के अधिपति शिव की सर्वशक्तिमता के प्रतीक हैं।#त्रिशूल प्रतीक#तीन शूल अर्थ#सत्व रज तम
पूजा समयपूजा का सही समय क्या है?पूजा का सर्वोत्तम समय: ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00–5:36)। त्रिकाल संध्या — सूर्योदय, दोपहर और सूर्यास्त — भी शुभ। शिव पूजा के लिए प्रदोष काल विशेष। नित्य एक ही समय पर पूजा करना — नियमितता सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।#पूजा समय
दैनिक कर्मसंध्या वंदन की विधि — कितनी बार करें?3 बार: प्रातः/मध्याह्न/सायं। आचमन→प्राणायाम→सूर्य अर्घ्य→गायत्री 108→उपस्थान→समर्पण। सरल: 5 मिनट=आचमन+प्राणायाम+गायत्री 10। न्यूनतम 1 बार(प्रातः)।#संध्या वंदन#त्रिकाल#गायत्री