मंदिर अनुष्ठानदक्षिण भारत के मंदिरों में कुंभाभिषेक की विधि उत्तर भारत से कैसे भिन्न है?दक्षिण: अनिवार्य, 45-48 दिन, 1008 कलश, आगम, 12 वर्ष, भव्य। उत्तर: कम, 1-7 दिन, 108 कलश, पुराण, 'प्राण प्रतिष्ठा' शब्द। दक्षिण = शिखर, उत्तर = मूर्ति।#कुंभाभिषेक#दक्षिण#उत्तर
मंदिर उत्सवदक्षिण भारत के मंदिरों में तेप्पोत्सव क्या होता है?नौका उत्सव (तमिल: तेप्पम्)। उत्सव मूर्ति → सजी नौका → पुष्करणी जल विहार → दीपमालिका। मीनाक्षी (मरियम्मन तेप्पकुलम), तिरुचि। जल = जीवन, विष्णु = क्षीरसागर।
मंदिर वास्तुदक्षिण भारत और उत्तर भारत के मंदिर की वास्तु में क्या अंतर है?उत्तर (नागर): वक्र शिखर, छोटा प्रांगण — खजुराहो। दक्षिण (द्राविड़): विशाल गोपुरम+प्रांगण+पुष्करणी+रंगीन — मीनाक्षी। समानता: गर्भगृह केंद्र, परिक्रमा।#दक्षिण#उत्तर#वास्तु
गणेश पूजागणेश जी की सूंड बाएं और दाएं दोनों तरफ की मूर्ति में क्या अंतर है?बाईं सूंड: सौम्य, गृहस्थ, सरल नियम, शीघ्र प्रसन्न (इड़ा/चंद्र)। दाईं सूंड: सिद्ध, उग्र, कठोर नियम, तांत्रिक (पिंगला/सूर्य)। घर = बाईं सूंड।#सूंड#बाएं#दाएं
तीर्थ स्थलपंचभूत स्थल मंदिर कौन से?पृथ्वी=कांचीपुरम, जल=तिरुवनैक्कावल(त्रिची), अग्नि=तिरुवण्णामलई, वायु=श्रीकालहस्ती, आकाश=चिदंबरम। 5 शिव मंदिर = 5 तत्व = शरीर शुद्धि। दक्षिण तीर्थ।#पंचभूत#5 तत्व#शिव
श्राद्ध विधिश्राद्ध कर्म करते समय किस दिशा में बैठें?दक्षिण दिशा (यम/पितर दिशा) में मुख। जनेऊ उल्टा (अपसव्य)। कुश आसन, बायाँ घुटना मोड़ें। पिंड/जल दक्षिण में। देव पूजा = उत्तर/पूर्व, पितर = दक्षिण।#श्राद्ध#दिशा#दक्षिण
तंत्र परंपरादक्षिण भारत की श्री विद्या और उत्तर भारत तंत्र में क्या अंतर है?दक्षिण: ललिता/सौम्य/श्री चक्र/समयाचार/प्रतीकात्मक/शंकराचार्य। उत्तर: काली/उग्र+सौम्य/कौलाचार/वास्तविक+प्रतीक/अभिनवगुप्त। एकता: शक्ति उपासना। श्री कुल vs काली कुल।#दक्षिण#उत्तर#श्री विद्या
मंदिर वास्तुमंदिर में गोपुरम क्या होता है और इसका क्या महत्व है?द्राविड़ विशाल प्रवेश द्वार। सीढ़ीदार, हजारों मूर्तियां='दृश्य पुराण'। दूर दर्शन, रक्षा, 4 दिशा। मीनाक्षी(14), श्रीरंगम(21=विश्व सबसे बड़ा)। गोपुरम > गर्भगृह शिखर।#गोपुरम#क्या#महत्व