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दर्भ से जुड़े सभी प्रश्न(4)

दर्भ पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

लेपभाज् पितरों को अन्न का लेप क्यों दिया जाता है?

लेपभाज् पितर चौथी से छठी पीढ़ी हैं; उन्हें पूर्ण पिण्ड के बजाय यजमान के हाथ का अन्न-लेप भाग मिलता है।

#लेपभाज्#अन्न लेप#श्राद्ध
ग्रहण

ग्रहण काल में कुश का प्रयोग क्यों करते हैं

ग्रहण में कुश: कुश = सर्वाधिक पवित्र तृण, सात्विक ऊर्जा। भोजन/जल पर रखने से ग्रहण का दूषित प्रभाव निष्प्रभ। तुलसी पत्र भी साथ। कुश पवित्री पहनकर जप। मान्यता: कुश नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित करता है। बिना कुश का भोजन ग्रहण बाद त्याज्य (कुछ परम्पराओं में)।

#ग्रहण#कुश#दर्भ
श्राद्ध विधि

श्राद्ध कर्म में कुश क्यों प्रयोग करते हैं?

कुश = सबसे पवित्र घास (विष्णु रोम से उत्पन्न)। ऊर्जा संवाहक, पितर माध्यम, रक्षा। आसन, पवित्री (अंगूठी), पिंड रखना, तर्पण — सब में कुश। कुश न मिले = दूब घास।

#कुश#दर्भ#श्राद्ध
मंत्र विधि

मंत्र जप में कुशा का आसन क्यों उत्तम माना जाता है?

गीता (6.11): कृष्ण ने स्वयं कुशा आसन विधान बताया ('कुशोत्तरम्')। 'कु=पाप, श=शमन — कुश=पाप नाशक।' ब्रह्माण्ड पुराण: कलियुग में सबसे पवित्र, अनंत गुना फल। वैज्ञानिक: विद्युत कुचालक — ऊर्जा संरक्षण। त्रिदेव: जड़=ब्रह्मा, मध्य=विष्णु, शीर्ष=शिव। विकल्प: ऊनी कंबल।

#कुशा#आसन#दर्भ
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