लोकलेपभाज् पितरों को अन्न का लेप क्यों दिया जाता है?लेपभाज् पितर चौथी से छठी पीढ़ी हैं; उन्हें पूर्ण पिण्ड के बजाय यजमान के हाथ का अन्न-लेप भाग मिलता है।#लेपभाज्#अन्न लेप#श्राद्ध
ग्रहणग्रहण काल में कुश का प्रयोग क्यों करते हैंग्रहण में कुश: कुश = सर्वाधिक पवित्र तृण, सात्विक ऊर्जा। भोजन/जल पर रखने से ग्रहण का दूषित प्रभाव निष्प्रभ। तुलसी पत्र भी साथ। कुश पवित्री पहनकर जप। मान्यता: कुश नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित करता है। बिना कुश का भोजन ग्रहण बाद त्याज्य (कुछ परम्पराओं में)।#ग्रहण#कुश
श्राद्ध विधिश्राद्ध कर्म में कुश क्यों प्रयोग करते हैं?कुश = सबसे पवित्र घास (विष्णु रोम से उत्पन्न)। ऊर्जा संवाहक, पितर माध्यम, रक्षा। आसन, पवित्री (अंगूठी), पिंड रखना, तर्पण — सब में कुश। कुश न मिले = दूब घास।#कुश#दर्भ#श्राद्ध
मंत्र विधिमंत्र जप में कुशा का आसन क्यों उत्तम माना जाता है?गीता (6.11): कृष्ण ने स्वयं कुशा आसन विधान बताया ('कुशोत्तरम्')। 'कु=पाप, श=शमन — कुश=पाप नाशक।' ब्रह्माण्ड पुराण: कलियुग में सबसे पवित्र, अनंत गुना फल। वैज्ञानिक: विद्युत कुचालक — ऊर्जा संरक्षण। त्रिदेव: जड़=ब्रह्मा, मध्य=विष्णु, शीर्ष=शिव। विकल्प: ऊनी कंबल।#कुशा#आसन#दर्भ