दिव्यास्त्रदोबारा चलाने पर क्या होता था?नारायणास्त्र दोबारा चलाने पर यह अस्त्र चलाने वाले की अपनी सेना का विनाश कर देता था। इसलिए इसे केवल एक बार ही प्रयोग किया जा सकता था।#नारायणास्त्र#दोबारा#खुद की सेना
मंदिर ज्ञानमंदिर में चढ़ाई गई सामग्री को दोबारा चढ़ा सकते हैं या नहीं?वर्जित। एक बार अर्पित = निर्माल्य → दोबारा = 'दिया वापस'=अशुभ। प्रसाद = ग्रहण, न चढ़ाएं। मंदिर A→B = वर्जित। 'ताजा+नया+शुद्ध = भगवान को।'#सामग्री#दोबारा
मंत्र जप नियममंत्र जप में एक दिन छूट जाए तो दोबारा शुरू करना पड़ता है क्या?पुनः आरंभ अनिवार्य नहीं (सामान्य)। छूटे दिन = अगले दिन दोगुना / अनुष्ठान 1 दिन बढ़ाएं। बीमारी = क्षम्य, आलस्य = प्रायश्चित। जारी रखें।#छूटना#दिन#दोबारा
मंत्र जप नियममंत्र जप छोड़ने के बाद दोबारा शुरू करने का क्या नियम है?कोई दंड नहीं। शुभ दिन + नया संकल्प। माला शुद्धि (गंगाजल+108 जप)। क्षमा प्रार्थना। 108/दिन से शुरू। 'देर आए दुरुस्त आए।' ईश्वर = प्रसन्न।#छोड़ना#दोबारा#शुरू