लोकनवमी श्राद्ध में दौहित्र का अधिकार है क्या?हाँ, दौहित्र को अधिकार है।#दौहित्र#श्राद्ध अधिकार#मातृ पक्ष
लोकपुत्र न हो तो माता का श्राद्ध कौन करे?योग्य परिजन या सपिण्ड कर सकते हैं।#माता श्राद्ध#श्राद्ध अधिकारी#दौहित्र
लोकनाती नाना का श्राद्ध कर सकता है?हाँ, पुत्र न हो तो नाती नाना-नानी का श्राद्ध कर सकता है।#नाती#दौहित्र#मातामह श्राद्ध
लोकनाती नाना का श्राद्ध कर सकता है?हाँ, पुत्र न होने पर नाती नाना-नानी का श्राद्ध कर सकता है।#नाती#नाना श्राद्ध#दौहित्र
मातामह श्राद्धदौहित्र का अर्थ क्या है?दौहित्र का अर्थ = 'पुत्री का पुत्र' (नाती)। माता के पिता (नाना) के दृष्टिकोण से = बेटी का बेटा। दौहित्र को नाना-नानी का श्राद्ध करने का विशिष्ट शास्त्रीय अधिकार है। याज्ञवल्क्य स्मृति: पौत्र और दौहित्र दोनों समान रूप से पूर्वजों को नरक से तार सकते हैं।#दौहित्र#नाती#पुत्री का पुत्र
मातामह श्राद्धमातामह श्राद्ध क्या है?मातामह श्राद्ध = नाना-नानी (माता के माता-पिता) का श्राद्ध, जो दौहित्र (पुत्री का पुत्र = नाती) द्वारा किया जाता है। इसे 'दौहित्र श्राद्ध' भी कहते हैं। पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि इसके लिए सर्वोत्कृष्ट है। यह मातृकुल के प्रति कृतज्ञता का शास्त्रीय विधान है।#मातामह श्राद्ध#नाना-नानी#दौहित्र