मंदिर ज्ञानमंदिर में तोरण बांधने का क्या अर्थ होता है?स्वागत (देवता+भक्त), शुभता (आम=सदाबहार), रक्षा (नकारात्मकता नहीं), ऊर्जा (ऑक्सीजन), उत्सव। 'तोरणं मंगलं विद्यात्'। आम पत्ता सर्वप्रचलित।#तोरण#बांधना#अर्थ
आत्मा और मोक्षआत्मा शरीर के किस हिस्से से निकलती है मृत्यु समयआत्मा ब्रह्मरंध्र (सिर) से निकले → मोक्ष/उत्तम गति (गीता 8.12-13)। नेत्र → देवलोक, नासिका → अंतरिक्ष, मुख → पुनर्जन्म, गुदा → अधोगति। योगी प्राण को सुषुम्ना नाड़ी से ब्रह्मरंध्र तक ले जाते हैं। निर्गमन कर्म और साधना पर निर्भर।#आत्मा
मंदिर ज्ञानमंदिर के द्वार पर द्वारपाल की मूर्ति क्यों होती है?रक्षक (अशुभ प्रवेश नहीं), जय-विजय (विष्णु), नंदी (शिव), भक्त परीक्षा (योग्यता), ऊर्जा सील। डरावने = नकारात्मकता भय → भागे। गर्भगृह सुरक्षा।#द्वारपाल#मूर्ति#द्वार
मंदिर ज्ञानमंदिर के द्वार पर स्वस्तिक का चिन्ह क्यों बनाते हैं?'शुभ करने वाला'। 4 दिशा, 4 वेद, 4 पुरुषार्थ, गणेश प्रतीक। रक्षा (नकारात्मक प्रवेश नहीं)। ऊर्जा attract। लाल (कुमकुम) = शक्ति। हर शुभ कार्य।#स्वस्तिक#चिन्ह#द्वार