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नान्दीमुख श्राद्ध से जुड़े सभी प्रश्न(4)

नान्दीमुख श्राद्ध पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्राद्ध भेद

नान्दीमुख श्राद्ध क्या है?

नान्दीमुख श्राद्ध वह विशेष श्राद्ध है जो किसी शुभ अवसर पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। नान्दी का अर्थ है आनन्द, और मुख का अर्थ है सम्मुख। इसे वृद्धिश्राद्ध भी कहते हैं। यह विवाह, उपनयन यानी जनेऊ, पुत्र-जन्म, गृह-प्रवेश, या यज्ञ से पहले होता है। इसमें पितरों के साथ देवताओं का भी आवाहन होता है, और भाव शुभ-हर्ष का होता है।

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नान्दीमुख श्राद्ध में स्वधा के स्थान पर स्वाहा क्यों आता है?

नान्दीमुख श्राद्ध में पितर देवतुल्य माने जाते हैं, इसलिए स्वधा के स्थान पर स्वाहा या सम्पन्नम् का प्रयोग होता है।

#नान्दीमुख श्राद्ध#स्वाहा#स्वधा
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विवाह या उपनयन से पहले नान्दीमुख श्राद्ध क्यों होता है?

विवाह या उपनयन से पहले नान्दीमुख श्राद्ध पितरों की प्रसन्नता और मांगलिक आशीर्वाद के लिए होता है।

#विवाह#उपनयन#नान्दीमुख श्राद्ध
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नान्दीमुख श्राद्ध कब किया जाता है?

नान्दीमुख श्राद्ध विवाह, उपनयन और पुत्र-जन्म जैसे मांगलिक कार्यों के समय किया जाता है।

#नान्दीमुख श्राद्ध#विवाह#उपनयन
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