भक्ति साहित्यकबीर के दोहे आध्यात्मिक शिक्षा के लिए कैसे उपयोगीकबीर के दोहे निर्गुण भक्ति, सरल ज्ञान, पाखंड-विरोध और मृत्यु-चेतना सिखाते हैं। 'कस्तूरी कुंडल बसे...' जैसे दोहे बताते हैं — ईश्वर भीतर है, बाहर मत खोजो।#कबीर#दोहे#निर्गुण भक्ति
भक्ति रसभक्ति में शांत भाव क्या होता है?शांत भाव: सबसे शांत-स्थिर भक्ति — तीव्र भावना रहित। 5 रसों में प्रथम+आधार। ईश्वर=निर्गुण ब्रह्म। भक्त=शांत-समभावी। गहन शांति+तृप्ति+समत्व। शुकदेव/चार कुमार/शंकराचार्य। 'आप हैं — बस।' ध्यान-प्रधान। 'अहं ब्रह्मास्मि'/'तत्त्वमसि'=मंत्र।#शांत रस
भक्ति रसभक्ति में शांत भाव क्या होता है?शांत भाव: सबसे शांत-स्थिर भक्ति — तीव्र भावना रहित। 5 रसों में प्रथम+आधार। ईश्वर=निर्गुण ब्रह्म। भक्त=शांत-समभावी। गहन शांति+तृप्ति+समत्व। शुकदेव/चार कुमार/शंकराचार्य। 'आप हैं — बस।' ध्यान-प्रधान। 'अहं ब्रह्मास्मि'/'तत्त्वमसि'=मंत्र।#शांत रस#शांत भाव#निर्गुण भक्ति