लोककर्मकांडी और ब्रह्मज्ञानी के दृष्टिकोण में स्वर्लोक को लेकर क्या अंतर है?कर्मकांडी स्वर्लोक को अंतिम लक्ष्य मानते हैं। ब्रह्मज्ञानी और भक्त इसे अस्थायी मानते हैं और सीधे मोक्ष चाहते हैं। भागवत कहता है — शुद्ध भक्त स्वर्लोक की कामना नहीं करते।#कर्मकांडी#ब्रह्मज्ञानी#स्वर्लोक
सद्योजात फलरुद्रलोक कैसे प्राप्त होता है?प्राणायामपरायण होकर ब्रह्मतत्परचित्त से विश्वेश्वरदेव की शरण लेने वाले विष्णुलोक को भी पार कर रुद्रलोक जाते हैं।#रुद्रलोक#विष्णुलोक
सद्योजात फलसद्योजात शिव की शरण लेने से क्या फल मिलता है?प्राणायामपरायण होकर ब्रह्मतत्परचित्त से सद्योजात की शरण लेने वाले पापों से मुक्त, विमल आत्मा और ब्रह्मज्ञानी हो जाते हैं।#सद्योजात#शरणागति#पाप मुक्ति
लोकसत्यलोक में 500 अप्सराएं किसका स्वागत करती हैं?500 अप्सराएं ब्रह्मज्ञानी जीव का स्वागत करती हैं — 100 माला, 100 लेप, 100 आभूषण, 100 वस्त्र और 100 सुगंधित चूर्ण लेकर। वे उसे ब्रह्मा के आभूषणों से अलंकृत करती हैं।#अप्सराएं#500#स्वागत