विस्तृत उत्तर
कौषीतकि ब्राह्मण उपनिषद के प्रथम अध्याय में वर्णित है कि जब कोई ब्रह्मज्ञानी जीव सत्यलोक पहुँचता है तो पाँच सौ अप्सराएँ उसका स्वागत करने आती हैं। इन पाँच सौ अप्सराओं का विभाजन इस प्रकार है — सौ अप्सराएँ मालाएँ लेकर, सौ सुगन्धित लेप लेकर, सौ आभूषण लेकर, सौ वस्त्र लेकर और सौ सुगन्धित चूर्ण लेकर आती हैं। ये सभी मिलकर उस ब्रह्मज्ञानी जीव को ब्रह्मा के आभूषणों से अलंकृत करती हैं। इस लोक में अप्सराएँ जिन्हें मानसी और चाक्षुषी कहा गया है निरन्तर पुष्पों से लोकों का ताना-बाना बुनती रहती हैं। यह स्वागत सत्यलोक में ब्रह्मज्ञान प्राप्त जीव का सम्मान और उसकी परम आध्यात्मिक उपलब्धि का प्रतीक है।
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