कुम्भक और ऐक्यईश्वर और जीव का ऐक्य कैसे प्राप्त होता है?केवल कुम्भक में समरस होकर हृदय में शिव का ध्यान करने से साधक ईश्वर और जीव के ऐक्य को प्राप्त करता है।#ईश्वर जीव ऐक्य#समरसता#कुम्भक
भक्ति रसभक्ति में शांत भाव क्या होता है?शांत भाव: सबसे शांत-स्थिर भक्ति — तीव्र भावना रहित। 5 रसों में प्रथम+आधार। ईश्वर=निर्गुण ब्रह्म। भक्त=शांत-समभावी। गहन शांति+तृप्ति+समत्व। शुकदेव/चार कुमार/शंकराचार्य। 'आप हैं — बस।' ध्यान-प्रधान। 'अहं ब्रह्मास्मि'/'तत्त्वमसि'=मंत्र।#शांत रस#शांत भाव
भक्ति रसभक्ति में शांत भाव क्या होता है?शांत भाव: सबसे शांत-स्थिर भक्ति — तीव्र भावना रहित। 5 रसों में प्रथम+आधार। ईश्वर=निर्गुण ब्रह्म। भक्त=शांत-समभावी। गहन शांति+तृप्ति+समत्व। शुकदेव/चार कुमार/शंकराचार्य। 'आप हैं — बस।' ध्यान-प्रधान। 'अहं ब्रह्मास्मि'/'तत्त्वमसि'=मंत्र।#शांत रस#शांत भाव#निर्गुण भक्ति