भक्ति एवं आध्यात्मभक्ति में संगीत का क्या स्थान हैसंगीत भक्ति का सबसे सहज माध्यम है। नवधा भक्ति में 'कीर्तन' एक प्रमुख अंग है। मीरा, सूरदास, कबीर जैसे संत-भक्त संगीत के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचे। 'नाद ब्रह्म' — ध्वनि ही ईश्वर है — यह योगशास्त्र का सिद्धांत संगीत और भक्ति को एक करता है।#भक्ति संगीत#भजन कीर्तन#संगीत आध्यात्म
देवी-देवता परिचयनारद मुनि की वीणा का नाम क्या है?नारद मुनि की वीणा का नाम 'महती' है। इससे सदा 'नारायण-नारायण' की ध्वनि निकलती है। माना जाता है कि वीणा का आविष्कार नारद जी ने ही किया था।#नारद मुनि#वीणा
भक्ति एवं आध्यात्मकीर्तन और भजन में क्या अंतर हैभजन व्यक्तिगत, ध्यान-भाव, काव्यात्मक रचना है। कीर्तन सामूहिक, प्रश्नोत्तर-शैली, उत्साहपूर्ण गान है। भजन में शांति का अनुभव, कीर्तन में ऊर्जा और उत्साह का।#कीर्तन#भजन#अंतर
मंदिर पूजामंदिर में पूजा के दौरान कौन सा भजन गाएं?विष्णु/कृष्ण: हरे कृष्ण महामंत्र, विष्णुसहस्रनाम। शिव: ओम नमः शिवाय, शिव तांडव। देवी: महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र। गणपति: गणेश पञ्चरत्न। नारद भक्तिसूत्र: भाव की शुद्धता स्वर-शुद्धता से अधिक महत्वपूर्ण।#भजन#कीर्तन#भक्ति संगीत