ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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मंदिर पूजा📜 भागवत पुराण (7.5.23), नारद भक्तिसूत्र (36-37), ललितासहस्रनाम, विष्णुसहस्रनाम2 मिनट पठन

मंदिर में पूजा के दौरान कौन सा भजन गाएं?

संक्षिप्त उत्तर

विष्णु/कृष्ण: हरे कृष्ण महामंत्र, विष्णुसहस्रनाम। शिव: ओम नमः शिवाय, शिव तांडव। देवी: महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र। गणपति: गणेश पञ्चरत्न। नारद भक्तिसूत्र: भाव की शुद्धता स्वर-शुद्धता से अधिक महत्वपूर्ण।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर में पूजा के दौरान भजन-कीर्तन की विधि और महत्व शास्त्रों में विस्तार से वर्णित है:

भागवत पुराण (7.5.23) — नवधा भक्ति में कीर्तन

श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्।' — भगवान का कीर्तन नवधा भक्ति का अभिन्न अंग है।

देवता-अनुसार उपयुक्त भजन

भगवान विष्णु / श्रीकृष्ण के लिए

  • 'हरे कृष्ण महामंत्र' (महामंत्र — कलियुग में सर्वोपरि, भागवत पुराण)
  • विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र (महाभारत, अनुशासन पर्व)
  • 'जय जगदीश हरे' (सार्वभौम वैष्णव भजन)

भगवान शिव के लिए

  • 'ओम नमः शिवाय' (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता)
  • 'शिव तांडव स्तोत्र' (रावण विरचित)
  • 'हर हर महादेव' नाद-कीर्तन

देवी के लिए

  • 'जय अम्बे गौरी' / 'जय माता दी'
  • महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र ('अयि गिरिनंदिनी...' — आदि शंकराचार्य)
  • ललितासहस्रनाम पाठ

गणपति के लिए

  • 'सुखकर्ता दुःखहर्ता' (संत तुकाराम / मराठी परंपरा)
  • गणेश पञ्चरत्न स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)

नारद भक्तिसूत्र (36-37) का निर्देश

भजन सच्ची श्रद्धा और प्रेम से गाया जाए — लय और स्वर की शुद्धता से अधिक महत्वपूर्ण है भाव की शुद्धता।

महत्वपूर्ण सिद्धांत

कीर्तन सामूहिक हो तो श्रेष्ठ (संकीर्तन) — भागवत पुराण। एकाकी भजन में 'मानस-जप' के साथ गाएं।

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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण (7.5.23), नारद भक्तिसूत्र (36-37), ललितासहस्रनाम, विष्णुसहस्रनाम
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मंदिर में पूजा के दौरान कौन सा भजन गाएं — शास्त्रों के अनुसार

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