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भोजन मंत्र से जुड़े सभी प्रश्न(4)

भोजन मंत्र पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

गृह आचार एवं पूजा विधि

भोजन के पहले और बाद में कौन से मंत्र बोलने चाहिए?

भोजन से पहले 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे' और 'ब्रह्मार्पणम्' श्लोक बोलें। भोजन के बाद पाचन हेतु 'अगस्त्यं कुम्भकर्णं च' मंत्र बोलें। भोजन से पहले हाथ-पाँव-मुँह धोना जरूरी है।

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नित्य मंत्र

भोजन के बाद कौन सा मंत्र बोलें?

भोजन पूर्व: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः...' (गीता 4.24) + पंचप्राण आहुति। भोजन बाद: 'अन्नदाता सुखी भव' + 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' (जल सहित) + आचमन। पूर्व/उत्तर मुख, मौन भोजन श्रेष्ठ।

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दैनिक कर्म

भोजन से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिए

भोजन से पहले: (1) गीता 4.24: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (2) उपनिषद: 'ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु' (3) 'अन्नब्रह्मा रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः' (4) अन्नपूर्णा स्तोत्र। पूर्व/उत्तर दिशा में मुख कर भूमि पर बैठकर भोजन करें।

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पूजा विधि एवं कर्मकांड

भोजन शुद्धि का मंत्र कौन सा है?

भोजन शुद्धि का मुख्य मंत्र है — 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (गीता 4.24), जिसका अर्थ है कि भोजन और भोजन-क्रिया सब ब्रह्म-स्वरूप हैं। इसके साथ 'ॐ सह नाववतु...' शांति मंत्र भी पढ़ा जाता है। इस प्रकार अन्न को ईश्वर को समर्पित करके प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परम्परा है।

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