तंत्र शास्त्रतंत्र में पंचमकार का वास्तविक अर्थ क्या है?5 मकार: मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन। दक्षिणाचार (प्रतीकात्मक): मद्य=अमृत, मांस=वाणी संयम, मत्स्य=प्राणायाम, मुद्रा=ध्यान, मैथुन=शिव-शक्ति मिलन (कुण्डलिनी)। वामाचार: यथार्थ — केवल दीक्षित। सामान्य = प्रतीकात्मक ही।#पंचमकार#मद्य#मांस
लोकअष्टमी श्राद्ध में मांस का प्रयोग सही है क्या?वर्तमान विधान में सात्विक भोजन ही मान्य है।#मांस#वर्जित#श्राद्ध भोजन
लोकपिशाच क्या खाते हैं?पिशाच मांस, मल-मूत्र और अशुद्ध पदार्थों का भक्षण करते हैं।#पिशाच भोजन#मांस#मल मूत्र
मरणोपरांत आत्मा यात्राश्राद्ध अन्न दानव योनि में क्या बनता है?दानव योनि में श्राद्ध अन्न मांस बन जाता है।#श्राद्ध अन्न#दानव योनि#मांस
मरणोपरांत आत्मा यात्राशास्त्रों में प्रेत को मांस की आवश्यकता का क्या उल्लेख है?शास्त्रों में प्रेत के लिए मांस का उल्लेख है, पर कलियुग में उसके स्थान पर केले या सात्त्विक द्रव्य दिए जाते हैं।#प्रेत#मांस#कलियुग
तंत्र पंचमकारतंत्र में मांस का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?वास्तविक: पशु/मांस भोग (बंगाल/असम)। प्रतीकात्मक (कुलार्णव): 'जिह्वा संयम' — वाणी नियंत्रण, मन विकार त्याग, शरीर अहंकार बलि। सामान्य = प्रतीकात्मक।#मांस#पंचमकार#आध्यात्मिक