मंत्र साधनादुर्गा सप्तशती के निर्वाण मंत्र की साधनायह 'नवार्ण' (9 अक्षरों का) मंत्र है: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। इसमें सरस्वती, लक्ष्मी और काली तीनों की शक्ति है। इसका जप जीवन के सभी दुःखों और शत्रुओं का पूर्ण नाश करता है।#नवार्ण मंत्र#दुर्गा#मार्कंडेय पुराण
लोकमार्कंडेय पुराण में अतल लोक को क्या कहा गया है?मार्कंडेय पुराण में अतल लोक को असुरों का वह सुरक्षित स्थान बताया गया है जो देवताओं की पहुँच से दूर है। युद्ध में हारने पर असुर यहाँ आकर शक्ति संचित करते हैं।#मार्कंडेय पुराण
दुर्गा सप्तशतीदुर्गा सप्तशती क्या है?दुर्गा सप्तशती = मार्कंडेय पुराण का विशिष्ट अंश। 700 श्लोक, 13 अध्याय। देवी माहात्म्य या चंडी पाठ भी कहते हैं। शाक्त परंपरा का मूल आधार। महिषासुर वध का ओजस्वी वर्णन। नित्य पाठ से आध्यात्मिक सुरक्षा, साहस और लौकिक ऐश्वर्य।#दुर्गा सप्तशती#700 श्लोक#मार्कंडेय पुराण
पुराण परिचयदुर्गा सप्तशती किस पुराण से ली गई है?दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण के 81वें से 93वें अध्याय (कुल 13 अध्याय) से ली गई है। इसे 'देवी महात्म्य' भी कहते हैं। मार्कंडेय पुराण में सुमेधा ऋषि, राजा सुरथ और वैश्य समाधि के संवाद में यह कथा वर्णित है।#मार्कंडेय पुराण#देवी महात्म्य#सप्तशती
पुराण परिचयदुर्गा सप्तशती किस पुराण से ली गई है?दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण के अध्याय 81 से 93 से ली गई है। इसे 'देवी महात्म्यम्' भी कहते हैं। मार्कंडेय पुराण 18 महापुराणों में से एक है और शाक्त परंपरा का सर्वोच्च ग्रंथ है।#मार्कंडेय पुराण#सप्तशती#स्रोत