मंत्र विधिसात्विक मंत्र और तामसिक मंत्र में क्या अंतर है?सात्विक: ज्ञान/मोक्ष/शांति (गायत्री, महामृत्युंजय) — शुद्ध, प्रकाश। राजसिक: धन/सत्ता/यश — बंधनकारी। तामसिक: मारण/उच्चाटन/हानि — विनाशकारी, पाप। गीता: 'सत्त्वात् ज्ञानम्'। सामान्य: सदा सात्विक।#सात्विक#तामसिक#राजसिक
आहार धर्मराजसिक और तामसिक भोजन में क्या अंतर?राजसिक(गीता 17.9): तीखा/नमकीन/गर्म=चंचल/क्रोध। तामसिक(17.10): बासी/मांस/शराब=आलस्य/जड़ता। राजसिक=उत्तेजक, तामसिक=सुस्त, सात्विक=संतुलित। Junk=तामसिक, Spicy=राजसिक, Fresh=सात्विक।#राजसिक#तामसिक
लोकयक्ष पूर्णतः राक्षसी क्यों नहीं माने जाते?यक्ष प्रकृति और धन के रक्षक अर्द्ध-दैवीय जीव हैं; उनमें तामसिक पक्ष है, पर वे पूर्णतः राक्षसी नहीं हैं।#यक्ष#राक्षस#अर्द्ध दैवीय
लोककर्म-सिद्धांत के अनुसार अतल लोक किन आत्माओं का गंतव्य है?जिन्होंने भौतिक संपदा की लालसा से तपस्या की (मोक्ष के लिए नहीं), जो राजसिक-तामसिक अहंकार में थे — वे मृत्यु के बाद अतल लोक जाते हैं।#कर्म सिद्धांत#अतल लोक#गंतव्य
लोकअतल लोक में जाने के लिए क्या कर्म करने पड़ते हैं?भौतिक संपदा की लालसा से की गई तपस्या और दान, राजसिक-तामसिक अहंकार — इन कर्मों से अतल लोक मिलता है। सकाम पुण्य का यही फल है।#कर्म#अतल लोक#राजसिक
लोकअतल लोक में कोई क्यों जाता है?जो लोग भौतिक संपदा की तीव्र लालसा से तपस्या या दान करते हैं (मोक्ष के लिए नहीं) वे मृत्यु के बाद अतल लोक जाते हैं। राजसिक-तामसिक कर्मों का यही फल है।#अतल लोक#कर्म#राजसिक
शिव शाबर मंत्रशिव शाबर मंत्रों को तामसिक श्रेणी में क्यों रखा जाता है?त्वरित प्रभाव और सीधे भौतिक प्रयोग के कारण इन्हें तामसिक कहा जाता है, पर उद्देश्य इसे सात्त्विक बना सकता है।#तामसिक#राजसिक#प्रकृति
मंत्र जप ज्ञानराजसिक मंत्र क्या होते हैं और किस उद्देश्य से जपे जाते हैं?सात्विक (मोक्ष/ज्ञान): गायत्री, 'ॐ'। राजसिक (धन/शक्ति/सफलता): लक्ष्मी, बगलामुखी। तामसिक (मारण/नाश): वर्जित। सात्विक > राजसिक > तामसिक। राजसिक = मान्य किन्तु बंधनकारी।#राजसिक#मंत्र#उद्देश्य