आश्रम धर्मवानप्रस्थ आश्रम कब लें और कैसे जिएँ?~50-65/बच्चे स्वतंत्र। सम्पत्ति सौंपो, सरल जीवन, NGO/मंदिर सेवा, ज्ञान बांटो, ध्यान/गीता/तीर्थ। भोग→योग। वानप्रस्थ≠त्याग=प्राथमिकता बदलो — संसार में रहो, संसार से मुक्त।#वानप्रस्थ#आश्रम#सेवानिवृत्ति
साधु और संतब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और यति साधु कैसे होते हैं?ब्रह्मचारी विद्यासाधना से, गृहस्थ विहित कर्म से, वानप्रस्थ वनतपस्या से और यति योग तथा यतिधर्म से साधु होता है।#ब्रह्मचारी#गृहस्थ#वानप्रस्थ
साधु और संतसाधु किसे कहा जाता है?जो अपने आश्रम के धर्म का साधन करता है, वह साधु कहा गया है।#साधु#ब्रह्मचारी#गृहस्थ
हिंदू दर्शनचार आश्रम व्यवस्था क्या है?चार आश्रम हैं — ब्रह्मचर्य (विद्यार्थी जीवन), गृहस्थ (दांपत्य और कर्तव्य), वानप्रस्थ (सांसारिक जिम्मेदारियों से क्रमिक विरक्ति) और संन्यास (पूर्ण त्याग और मोक्ष-साधना)। मनुस्मृति में 100 वर्ष की आयु को आधार मानकर प्रत्येक आश्रम को 25 वर्ष का माना गया है।#चार आश्रम#ब्रह्मचर्य#गृहस्थ