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वृद्धिश्राद्ध से जुड़े सभी प्रश्न(6)

वृद्धिश्राद्ध पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्राद्ध भेद

वृद्धिश्राद्ध किसे कहते हैं?

वृद्धिश्राद्ध वह श्राद्ध है जो किसी वृद्धि या शुभ अवसर पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इसे ही नान्दीमुख श्राद्ध भी कहते हैं। यह विवाह, उपनयन यानी जनेऊ, पुत्र-जन्म, गृह-प्रवेश, या यज्ञ से पहले होता है। इसमें हर्ष का भाव प्रबल होता है, और देवताओं का भी आवाहन होता है। पितरों के आशीर्वाद से शुभ कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होता है।

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श्राद्ध भेद

नान्दीमुख श्राद्ध क्या है?

नान्दीमुख श्राद्ध वह विशेष श्राद्ध है जो किसी शुभ अवसर पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। नान्दी का अर्थ है आनन्द, और मुख का अर्थ है सम्मुख। इसे वृद्धिश्राद्ध भी कहते हैं। यह विवाह, उपनयन यानी जनेऊ, पुत्र-जन्म, गृह-प्रवेश, या यज्ञ से पहले होता है। इसमें पितरों के साथ देवताओं का भी आवाहन होता है, और भाव शुभ-हर्ष का होता है।

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नान्दीमुख श्राद्ध में स्वधा के स्थान पर स्वाहा क्यों आता है?

नान्दीमुख श्राद्ध में पितर देवतुल्य माने जाते हैं, इसलिए स्वधा के स्थान पर स्वाहा या सम्पन्नम् का प्रयोग होता है।

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वृद्धिश्राद्ध क्या है?

वृद्धिश्राद्ध मांगलिक कार्यों के समय किया जाने वाला नान्दीमुख श्राद्ध है।

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नान्दीमुख श्राद्ध कब किया जाता है?

नान्दीमुख श्राद्ध विवाह, उपनयन और पुत्र-जन्म जैसे मांगलिक कार्यों के समय किया जाता है।

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नान्दीमुख पितर कौन हैं?

नान्दीमुख पितर मांगलिक कार्यों में प्रसन्न और आह्लादित रूप में आहूत पितर हैं।

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