लोकब्रह्मचारी को महर्लोक क्यों मिलता है?जो विद्यार्थी आजीवन अखंड ब्रह्मचर्य पालन करे, गहन वेदाध्ययन करे और बिना सांसारिक इच्छा के गुरु में समर्पित रहे, वह मृत्यु के बाद सीधे महर्लोक प्राप्त करता है।#ब्रह्मचारी#महर्लोक#अखंड ब्रह्मचर्य
श्रीमद्भागवतवेद पढ़ने का अंतिम उद्देश्य क्या है?नारदजी कहते हैं कि तपस्या, वेदाध्ययन, यज्ञ, स्वाध्याय, ज्ञान और दान का अविचल उद्देश्य कृष्ण के गुणों का वर्णन है।#वेद#वेदाध्ययन#कृष्ण गुण
नित्यकर्मब्रह्मयज्ञ क्या है और कैसे करेंब्रह्मयज्ञ = वेद/शास्त्र का अध्ययन-अध्यापन। पंच महायज्ञों में प्रथम। ऋषि ऋण मुक्ति हेतु। विधि: संध्या के बाद वेद शाखा का पाठ, गायत्री जप, ऋषि तर्पण। सरल रूप: प्रतिदिन गीता/उपनिषद् का कुछ अंश पढ़ना-मनन करना। मनुस्मृति, तैत्तिरीय आरण्यक में विधान।#ब्रह्मयज्ञ#पंच महायज्ञ#वेदाध्ययन