पूजा पद्धतिवैदिक और पौराणिक पूजा पद्धति में क्या मूलभूत अंतर हैवैदिक पूजा: यज्ञ प्रधान, वैदिक मंत्र, निराकार देवता (अग्नि, इन्द्र), ऋत्विज आवश्यक। पौराणिक पूजा: मूर्ति पूजा प्रधान, नाम मंत्र/स्तोत्र, साकार देवता (विष्णु, शिव, दुर्गा), कोई भी कर सकता है। पौराणिक में षोडशोपचार, व्रत, तीर्थ, कीर्तन। आज दोनों का मिश्रण प्रचलित है।#वैदिक पूजा#पौराणिक पूजा#यज्ञ
तंत्र-वेद तुलनातांत्रिक विधि और वैदिक विधि में पूजा का क्या अंतर है?वैदिक: बाह्य यज्ञ-हवन, वेद मंत्र, अग्नि आहुति, द्विज अधिकार, चतुर्वर्ग लक्ष्य। तांत्रिक: आंतरिक साधना, बीज मंत्र-यंत्र-न्यास, शक्ति उपासना, जाति-भेद नहीं, भोग+मोक्ष दोनों। दोनों विरोधी नहीं — आज की पूजा में दोनों का मिश्रण।
शिव पूजारुद्राभिषेक क्या होता है?रुद्राभिषेक = रुद्र (शिव) + अभिषेक + वैदिक मंत्र-पाठ। मूल: तैत्तिरीय संहिता (4.5) — श्री रुद्रम् (नमकम्) + चमकम्। नमकम् = 11 अनुवाक — 108 रूपों की स्तुति। चमकम् = 346 वर-प्रार्थना। सबसे शक्तिशाली वैदिक शिव-पूजा।#रुद्राभिषेक#परिभाषा#श्री रुद्रम्