ग्रह मंत्रशुक्र गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे...तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' 16,000। शुक्रवार, श्वेत वस्त्र, हीरा/स्फटिक। शुक्र = सुख/सौंदर्य/दांपत्य। + लक्ष्मी पूजा।#शुक्र#गायत्री#सुख
वार शास्त्रशुक्रवार को कौन से काम शुभ?शुक्रवार=शुक्र(लक्ष्मी/सौंदर्य)। खरीदारी, वाहन, कपड़े, आभूषण, कला, गृहप्रवेश। संतोषी/लक्ष्मी पूजा। खट्टा वर्जित(व्रत)।#शुक्रवार#शुभ#शुक्र
ज्योतिष उपायशुक्र महादशा में क्या लाभ होता है?20 वर्ष(सबसे लंबी)। शुभ: विवाह सुख, धन-ऐश्वर्य, वाहन, कला/संगीत, सौंदर्य। अशुभ उपाय: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं' 108, हीरा/ओपल(ज्योतिषी), शुक्रवार व्रत+सफ़ेद दान, लक्ष्मी पूजा, श्री सूक्त। शुक्र=लक्ष्मी=ऐश्वर्य। संयम आवश्यक।#शुक्र#महादशा#20 वर्ष
ऋषि संततिऊर्जा और वसिष्ठ की संतान कौन थीं?ऊर्जा और वसिष्ठ से रज, सुहोत्र, बाहु, सवन, अनघ, सुतपा और शुक्र नामक सात पुत्र उत्पन्न हुए।#ऊर्जा#वसिष्ठ#रज
रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवीहीरे को सिद्ध करने का मंत्र क्या है?हीरे को सिद्ध करने का मंत्र: 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — यह माँ महालक्ष्मी का बीज मंत्र है।#हीरा सिद्धि मंत्र#महालक्ष्मी बीज मंत्र#ॐ श्रीं ह्रीं
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग६ मुखी रुद्राक्ष किस ग्रह दोष को दूर करने के लिए पहना जाता है?६ मुखी रुद्राक्ष शुक्र या मंगल ग्रह के दोषों को दूर करने में सहायक होता है।#6 मुखी#शुक्र#मंगल
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग६ मुखी रुद्राक्ष किस देवता का स्वरूप है और इसका मंत्र क्या है?६ मुखी रुद्राक्ष कार्तिकेय स्वरूप है, इसका मंत्र 'ॐ ह्रीं हुं नमः' है और यह आरोग्य तथा ऐश्वर्य प्रदान करता है।#6 मुखी#कार्तिकेय#शुक्र
पंचांग एवं ज्योतिषपूर्वाषाढ़ा नक्षत्र क्या होता है?पूर्वाषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 20वाँ। धनु 13°20'–26°40'। स्वामी शुक्र, देवता अपः (जल)। प्रतीक हाथी-दाँत/पंखा। जल-शुद्धि-यात्रा के लिए अनुकूल। जन्म में आत्मविश्वासी, अजेय, प्रभावशाली वाणी।#पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषपूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र क्या होता है?पूर्वाफाल्गुनी 27 नक्षत्रों में एकादश। सिंह 13°20'–26°40'। स्वामी शुक्र, देवता भग। प्रतीक शय्या/पंखा। कला-मनोरंजन के लिए अनुकूल। जन्म में आकर्षक, उदार, कलाप्रेमी, सुखभोगी।#पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषभरणी नक्षत्र क्या होता है?भरणी 27 नक्षत्रों में द्वितीय। मेष 13°20'–26°40'। स्वामी शुक्र, देवता यम। प्रतीक योनि। क्रूर कार्यों के लिए अनुकूल। जन्म में दृढ़, महत्वाकांक्षी, न्यायप्रिय।#भरणी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
राशि अनुसार उपायवृष राशि शुभ रत्नवृष=शुक्र। हीरा (सर्वोत्तम)/ओपल/जिरकॉन (सस्ता)। अनामिका, सोना/प्लैटिनम, शुक्रवार, "ॐ शुं शुक्राय नमः" 108। ज्योतिषी अनिवार्य — शत्रु ग्रह = हानि। 6 मुखी, सफेद दान।#वृष#शुक्र#रत्न
राशि अनुसार उपायतुला राशि शुक्र कैसे मजबूत करेंतुला=शुक्र। लक्ष्मी+श्री सूक्त+शुक्रवार। हीरा/ओपल, 6 मुखी। स्त्री सम्मान=सबसे प्रभावी। Q898 विस्तार।#तुला#शुक्र#मजबूत
ज्योतिष दोष एवं उपायशुक्र ग्रह मजबूत करने के लिए क्या करेंलक्ष्मी पूजा, 'ॐ शुं शुक्राय नमः', शुक्रवार, श्री सूक्त, सफेद दान, हीरा/ओपल, 6 मुखी। स्त्री सम्मान=सबसे प्रभावी।#शुक्र#मजबूत#उपाय
ज्योतिष दोष एवं उपायशुक्र ग्रह कमजोर होने के लक्षणदांपत्य कलह, प्रेम विफलता, सौंदर्य कम, वाहन समस्या, भौतिक सुख अभाव, मधुमेह/गुर्दा, कला रुचि कम।#शुक्र#कमजोर#लक्षण
रत्नहीरा रत्न पहनने के लाभ नुकसानहीरा = शुक्र। लाभ: सौंदर्य, धन, दांपत्य, कला। नुकसान: सूर्य/चंद्र शत्रुता, अति भौतिकता। अनामिका, सोना, शुक्रवार। सबसे शक्तिशाली — बिना ज्योतिषी बिल्कुल न पहनें।#हीरा#शुक्र#Diamond
दैनिक आचारशुक्रवार को कौन सा रंग शुभ हैशुक्रवार = सफेद/गुलाबी (शुक्र ग्रह)। सौंदर्य, प्रेम, दांपत्य सुख। लक्ष्मी/देवी पूजा। हीरा रत्न। ज्योतिष परंपरा।#शुक्रवार#रंग#शुक्र
हवनहवन में गूलर की लकड़ी का क्या विधान हैगूलर: शुक्र समिधा (शुक्र शान्ति अनिवार्य), स्वर्गदायिनी, अग्निगर्भ, क्षीर वृक्ष, शिशिर ऋतु, सोमयाग पात्र। विवाह/सौभाग्य हवन।#गूलर#उदुम्बर#शुक्र
ग्रह शांतिशुक्र ग्रह शांति पूजा कैसे करेंशुक्र शान्ति: (1) बीज मंत्र जप (16,000) + हवन (श्वेत चन्दन, तिल)। (2) लक्ष्मी पूजा/श्री सूक्त — अधिदेवता। (3) शुक्रवार व्रत। उपाय: श्वेत वस्तुएँ दान, गाय सेवा, स्त्री सम्मान। रत्न: हीरा/ओपल। शुक्र = सौन्दर्य, विवाह, ऐश्वर्य कारक।#शुक्र#ग्रह दोष#लक्ष्मी
ग्रह उपायशुक्र ग्रह मजबूत करने के शुक्रवार उपाय?लक्ष्मी/संतोषी पूजा, 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय' 108, सफ़ेद वस्तु/दूध/मिश्री दान, शुक्रवार व्रत, हीरा/ओपल(ज्योतिषी), साफ-सुथरा रहें, महिला सम्मान। पत्नी सम्मान=शुक्र प्रसन्न।#शुक्र#शुक्रवार#लक्ष्मी