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सगुण से जुड़े सभी प्रश्न(6)

सगुण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव तत्त्व

शिव सगुण और निर्गुण कैसे हैं?

विष्णु ने कहा कि महादेव ने अपने को सगुण और निर्गुण दो रूपों में विभाजित किया; निर्गुण अव्यक्त और सगुण महेश्वर रूप में हैं।

#सगुण#निर्गुण#महेश्वर
लोक

हिरण्यगर्भ की उपासना और सत्यलोक का क्या संबंध है?

हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा का सार्वभौमिक स्वरूप) की निष्काम उपासना सत्यलोक का द्वार खोलती है। यह देवयान मार्ग से क्रम मुक्ति का मार्ग है।

#हिरण्यगर्भ#सत्यलोक#सगुण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने 'निर्गुण' और 'सगुण' राम में किसे श्रेष्ठ बताया?

तुलसीदासजी ने कहा — 'अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा' — दोनों ब्रह्म के स्वरूप हैं, किसी को बड़ा-छोटा कहना अपराध है। किन्तु सगुण भक्ति (राम की लीला) कलियुग में सुगम मार्ग बताया गया।

#बालकाण्ड#निर्गुण#सगुण
हिंदू दर्शन

निर्गुण ब्रह्म और सगुण ब्रह्म में क्या अंतर

निर्गुण ब्रह्म = निराकार, गुणरहित, 'नेति नेति' (बृहदारण्यक 2.3.6) — ज्ञान मार्ग। सगुण ब्रह्म = साकार, गुणयुक्त (राम, कृष्ण, शिव) — भक्ति मार्ग। गीता 12.5 — निर्गुण कठिन, सगुण सरल। दोनों एक ही ब्रह्म के दो पहलू — जैसे जल और बर्फ।

#निर्गुण#सगुण#ब्रह्म
ध्यान साधना

ध्यान के कितने प्रकार होते हैं?

ध्यान के मुख्य प्रकार हैं — सगुण (इष्टदेव का ध्यान), निर्गुण (निराकार ब्रह्म), ओम्-नाद ध्यान, सोऽहम् ध्यान (श्वास के साथ), त्राटक, विपश्यना, चक्र-ध्यान और मंत्र-ध्यान। गीता (12/2-5) में सगुण ध्यान को नए साधकों के लिए सरल और श्रेष्ठ बताया गया है।

#ध्यान#प्रकार#सगुण
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में ब्रह्म का वर्णन कैसे है?

उपनिषदों में ब्रह्म को 'सत्यं ज्ञानमनन्तं' (तैत्तिरीय 2/1) और 'नेति नेति' (बृहदारण्यक 3/9/26) से परिभाषित किया गया है। केनोपनिषद कहता है — ब्रह्म मन-इंद्रियों से परे है। चार महावाक्य — 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अयमात्मा ब्रह्म' — उपनिषदों का सार हैं।

#ब्रह्म#उपनिषद#निर्गुण
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