श्रीमद्भागवतहृदय की गांठ टूटने का मतलब क्या है?हृदय की गांठ टूटना भगवान के साक्षात्कार से भीतर की आसक्ति, संदेह और कर्मबंधन के कटने का संकेत है।#हृदय ग्रंथि#भक्ति#साक्षात्कार
गुरु शिष्य परंपरा परिचयशास्त्रों ने गुरु का स्थान ईश्वर से ऊपर क्यों माना है?शास्त्र गुरु को ईश्वर से ऊपर इसलिए मानते हैं क्योंकि ईश्वर का साक्षात्कार कराने वाले पथ-प्रदर्शक स्वयं गुरु ही होते हैं — वे अज्ञान-अंधकार नष्ट कर शिवत्व में विलीन होने का मार्ग देते हैं।#गुरु ईश्वर से ऊपर
भक्ति एवं आध्यात्मईश्वर को देखा जा सकता है क्याहाँ, ईश्वर का साक्षात्कार संभव है — परंतु बाहरी आँखों से नहीं। कठोपनिषद कहता है कि सूक्ष्म बुद्धि और साधना से ही उनका दर्शन होता है। अनन्य भक्ति, ध्यान और अहंकार-विसर्जन इसके मार्ग हैं।#ईश्वर दर्शन#साक्षात्कार#उपनिषद
ध्यानध्यान के दौरान भगवान का अनुभव कैसे होता है?ध्यान में भगवद-अनुभव: भागवत (3.28.17): निर्मल दृष्टि से हृदय में 'अव्यय ज्योति' दर्शन। 3 स्तर: स्थूल दर्शन (मूर्ति-रूप), प्रकाश-दर्शन (श्वेत/स्वर्णिम प्रकाश), आनंद-अनुभव (तुरीय = ब्रह्म-साक्षात्कार)। भक्ति-परिपक्वता और इष्ट-कृपा से मिलता है — बल-पूर्वक नहीं।#ध्यान#भगवान#साक्षात्कार
ध्यान साधनाध्यान करने से आत्मज्ञान कैसे मिलता है?ध्यान में स्थूल से सूक्ष्म की यात्रा — शरीर → श्वास → मन → बुद्धि → चेतना — के क्रम में आत्मज्ञान मिलता है। गीता (6/20-21) में समाधि में आत्मा को आत्मा से देखना ही आत्मज्ञान है। 'नेति नेति' विचार से जो शेष रहे — शुद्ध साक्षी — वही आत्मा है।#ध्यान#आत्मज्ञान#साक्षात्कार