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सिद्धि विधि से जुड़े सभी प्रश्न(7)

सिद्धि विधि पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 7 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मंत्र साधना

साबर मंत्र सिद्ध करने का तरीका

साबर मंत्र क्षेत्रीय भाषाओं के स्वयं सिद्ध मंत्र हैं। इन्हें जाग्रत करने के लिए ग्रहण, होली या दिवाली की रात को पूर्ण विश्वास के साथ 108 या 1080 बार जपा जाता है।

#साबर मंत्र#नाथ संप्रदाय#सिद्धि विधि
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हनुमान मंत्र सिद्धि कैसे करें?

मुख्य मंत्र: 'ॐ हं हनुमते नमः' (5 अक्षर = 5 लाख पुरश्चरण)। मंगलवार-शनिवार, हनुमान जयंती। 41 दिन का अनुष्ठान प्रचलित। केसरिया वस्त्र, मूंगा/रुद्राक्ष माला। भोग: सिन्दूर, लड्डू। हनुमान चालीसा 108 बार = मंत्र-जप तुल्य। कलियुग में सर्वाधिक जाग्रत देवता।

#हनुमान मंत्र#रामदूत#सिद्धि विधि
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दुर्गा मंत्र सिद्धि कैसे करें?

नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (9 अक्षर = 9 लाख पुरश्चरण) — सर्वश्रेष्ठ। नवरात्रि, मंगलवार, अष्टमी-नवमी। लाल वस्त्र, रुद्राक्ष माला। दुर्गा सप्तशती = 1 लाख मंत्र तुल्य। भोग: लाल गुड़हल, नारियल। सिद्धि: निर्भयता और सिंह-स्वप्न।

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गणेश मंत्र सिद्धि कैसे करें?

मुख्य मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (6 अक्षर = 6 लाख पुरश्चरण)। बुधवार, गणेश चतुर्थी। लाल वस्त्र। भोग: मोदक, दूर्वा (21/108)। गणपत्यथर्वशीर्ष के 21 पाठ शक्तिशाली। गणेश-सिद्धि से सभी साधनाओं के विघ्न दूर। ध्यान: एकदंत, मोदकहस्त गणपति।

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लक्ष्मी मंत्र सिद्धि कैसे प्राप्त करें?

मुख्य मंत्र: 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' (8 अक्षर = 8 लाख पुरश्चरण)। कमलगट्टा माला, पीले/सफेद वस्त्र, लाल आसन। शुक्रवार, शरद पूर्णिमा, दीपावली। श्री सूक्त पाठ + हवन। भोग: खीर, कमल। लक्ष्मी तंत्र: आलस्य वर्जित — स्वच्छता और परिश्रम अनिवार्य।

#लक्ष्मी मंत्र#धन सिद्धि#श्री विद्या
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महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि कैसे करें?

महामृत्युंजय = 33 अक्षर → पुरश्चरण = 33 लाख। रुद्राक्ष माला अनिवार्य। सोमवार, महाशिवरात्रि, ग्रहण काल विशेष। हवन: तिल-जौ-दूर्वा-घी। रोगी की ओर से परिवार भी कर सकता है। ध्यान: त्र्यम्बक शिव — तीन नेत्र, चंद्रमौलि। सिद्धि: शरीर में उष्णता, स्वप्न में नीलकंठ दर्शन।

#महामृत्युंजय#मृत्युंजय#शिव मंत्र
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गायत्री मंत्र की सिद्धि कैसे करें?

गायत्री = 24 अक्षर → पुरश्चरण = 24 लाख जप। त्रिसंध्या उपासना सर्वोत्तम। साधना: सूर्यमुखी, लाल-पीले वस्त्र, स्फटिक माला, ब्रह्मचर्य। हवन (10वाँ भाग), तर्पण, मार्जन। ध्यान: हंसवाहिनी गायत्री देवी। सिद्धि: प्रकाश-अनुभव और बुद्धि-स्पष्टता।

#गायत्री#सिद्धि विधि#पुरश्चरण
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