शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म'एको हं बहुस्याम्' का क्या अर्थ है?'एको हं बहुस्याम्' का अर्थ है 'मैं एक हूँ, अनेक हो जाऊँ' — यह परब्रह्म का वह संकल्प है जिससे निर्गुण में स्पंदन उत्पन्न हुआ और नाद-ब्रह्म (शब्द-ब्रह्म) प्रकट हुआ।#एको हं बहुस्याम्#परब्रह्म संकल्प#सृष्टि उत्पत्ति
शब्द ब्रह्म और मंत्र विज्ञाननाद ब्रह्म का सिद्धांत क्या है?नाद ब्रह्म सिद्धांत: सृष्टि की उत्पत्ति अनाहत नाद से हुई — परब्रह्म के 'एकोऽहं बहुस्याम' संकल्प का प्रथम स्पंदन 'नाद' था जिससे ब्रह्मांड बना। इसीलिए शब्द को ही 'ब्रह्म' कहते हैं।
वेद एवं शास्त्रनासदीय सूक्त क्या है ऋग्वेद में?नासदीय सूक्त ऋग्वेद (१०।१२९) का दार्शनिक सूक्त है जिसमें ७ मन्त्रों में सृष्टि-पूर्व की अवस्था का वर्णन है। उस समय न सत् था, न असत् — केवल तमस था। पहले 'काम' उत्पन्न हुआ और सृष्टि आरम्भ हुई। यह विश्व-साहित्य में सृष्टि-रहस्य पर सबसे पुरानी दार्शनिक रचना है।#नासदीय सूक्त#ऋग्वेद#सृष्टि उत्पत्ति