दिव्यास्त्रभौमास्त्र की विध्वंसक शक्तियाँ क्या-क्या थीं?भौमास्त्र पृथ्वी में दरारें पैदा कर सेनाओं को निगल सकता था। इसके प्रयोग से पत्थर खिसकते थे, धरती कांपती थी और लावा प्रकट होने का संकट होता था।#भौमास्त्र#विध्वंसक शक्ति#भूकंप
दिव्यास्त्रपर्वतास्त्र का मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या था?पर्वतास्त्र शत्रु सेना को स्वयं प्रकृति का प्रकोप प्रतीत होता था। आकाश से पर्वत गिरते देख साधारण सैनिक का मनोबल टूट जाना स्वाभाविक था क्योंकि इसका कोई पारंपरिक उत्तर नहीं था।#पर्वतास्त्र#मनोवैज्ञानिक प्रभाव
दिव्यास्त्रपर्वतास्त्र किस प्रकार का अस्त्र था?पर्वतास्त्र एक अंधाधुंध विनाश का हथियार था जो शत्रु सेना को एक क्षण में कुचल देता था। इसकी अनियंत्रित प्रकृति के कारण इसे अंतिम उपाय का हथियार माना जाता था।#पर्वतास्त्र#अंधाधुंध विनाश#सेना
दिव्यास्त्रअंतर्धान अस्त्र की निद्रा शक्ति क्या होती थी?अंतर्धान अस्त्र की निद्रा शक्ति से शत्रु को गहरी नींद या बेहोशी में डाला जा सकता था। यह बिना रक्तपात के पूरी सेना को निष्क्रिय करने का अहिंसक तरीका था।#अंतर्धान अस्त्र#निद्रा शक्ति#बेहोशी
महाभारतयुद्ध से पहले दोनों पक्षों में कितने योद्धा थे?महाभारत में कौरव पक्ष के पास 11 अक्षौहिणी और पांडव पक्ष के पास 7 अक्षौहिणी सेना थी। कुल 18 अक्षौहिणी — जो लाखों योद्धाओं के बराबर थी। 18 दिन के युद्ध के बाद दोनों पक्षों से मिलाकर केवल 18 के आसपास योद्धा जीवित बचे।#कुरुक्षेत्र#सेना#कौरव