विस्तृत उत्तर
युद्ध में भौमास्त्र एक प्रलयंकारी शक्ति बन जाता था। यह शत्रु को 'भूमि के गर्भ में' भेज सकता था, जिसका अर्थ है कि यह पृथ्वी में दरारें पैदा करके पूरी सेनाओं को निगल सकता था। इसका सबसे भयावह प्रदर्शन रामायण काल में लव-कुश के प्रयोग में देखने को मिलता है जहाँ इसके प्रभाव से पत्थर खिसकने लगे, धरती कांप उठी और युद्धभूमि में लावा प्रकट होने का संकट उत्पन्न हो गया। यह एक नियंत्रित भूगर्भीय आपदा का दृश्य प्रस्तुत करता है। इसका धारक उस भूमि को ही अपना प्राथमिक हथियार बना लेता था जिस पर शत्रु खड़ा होता था।
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