विस्तृत उत्तर
पर्वतास्त्र की भौतिक क्षति से कहीं अधिक इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव था। शत्रु के लिए यह किसी मानवीय योद्धा का आक्रमण नहीं, बल्कि स्वयं प्रकृति का प्रकोप प्रतीत होता था। जब आकाश से ही पर्वत गिरने लगें, तो साधारण सैनिक का मनोबल टूट जाना स्वाभाविक था। यह एक ऐसा भय उत्पन्न करता था जिसका कोई पारंपरिक उत्तर नहीं था। सैनिकों के मन में यह विश्वास ही नहीं बैठता था कि किसी मानवीय शक्ति से इसका सामना संभव है, जिससे उनका युद्ध करने का संकल्प टूट जाता था।
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