विस्तृत उत्तर
जब कोई योद्धा पर्वतास्त्र का संधान करता था, तो युद्धभूमि का दृश्य पूरी तरह बदल जाता था। आकाश में बादल नहीं, बल्कि विशाल पर्वत और चट्टानें प्रकट होने लगती थीं और गुरुत्वाकर्षण के नियम को धता बताते हुए वे शत्रु सेना पर कहर बनकर टूट पड़ती थीं। यह केवल पत्थरों की वर्षा नहीं थी, यह एक प्रलय का दृश्य था जहाँ संपूर्ण पर्वत आकाश से गिरकर अपने नीचे आने वाली हर चीज को धूल में मिला देते थे। पैदल सैनिक, घुड़सवार, रथ और यहाँ तक कि विशालकाय हाथी भी इन गिरते हुए पर्वतों के नीचे कुचलकर नष्ट हो जाते थे।
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