विस्तृत उत्तर
सुधर्मा सभा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके भीतर प्रवेश करते ही प्राणी के भीतर से शोक, जरा (बुढ़ापा), थकान, मानसिक चिंता और भय का पूर्णतः नाश हो जाता है। महाभारत के सभा पर्व में देवर्षि नारद ने इस सभा का यही सबसे अद्भुत गुण बताया है। यह सभा कोई पृथ्वी के भवनों के समान स्थिर संरचना नहीं है बल्कि यह एक 'काम-गामिनी' संरचना है अर्थात यह इच्छा के अनुसार आकाश में तीव्र या मंद गति से विचरण कर सकती है। इस राजसभा में उपस्थित होने वाले सदस्यों में सिद्ध, साध्य, मरुद्गण और देवर्षि अपने तेजोमयी स्वरूप में उपस्थित होते हैं। देवताओं के गुरु बृहस्पति और असुरों के गुरु शुक्राचार्य भी इस सभा में नित्य विराजमान रहते हैं। यह सभा ब्रह्मांड के शासन, न्याय और यज्ञों के फल-वितरण का सर्वोच्च केंद्र है।
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