लोकहत्या के बाद आत्मा प्रेत रूप में क्यों भटकती है?हत्या अकाल और हिंसक मृत्यु है; अधूरी आयु, आसक्ति और संस्कार-अभाव से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।#हत्या#प्रेत योनि#अकाल मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्राहत्या से मृत्यु को अकाल मृत्यु क्यों माना गया है?हत्या से हुई मृत्यु गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु के कारणों में शामिल है।#हत्या#अकाल मृत्यु#नारायण बलि
जीवन एवं मृत्युहत्या करने वाले को क्या दंड मिलता है?हत्यारे को — ब्रह्महत्यारे को वैतरणी, निर्दोष-हत्यारे को लोहशंकु नरक (कीलें), गोहत्यारे को रक्त-गड्ढे में काँटे, जीव-हत्यारे को क्रीमिक नरक (कीट)। पुनर्जन्म में स्वयं उसी हिंसा का शिकार।#हत्या#दंड#नरक
नरक एवं परलोकविषान्न देकर मारने वाले को वैतरणी में कौन सा दंड मिलता है?गरुड़ पुराण के अनुसार विष मिला भोजन देकर मारने वाले को 'रक्षकभोजन' नरक में स्वयं विषयुक्त भोजन खिलाया जाता है। वैतरणी में उसे विषधर सर्प डसते हैं — जैसा पाप, वैसा दंड।#विषान्न#हत्या#वैतरणी