फलश्रुतिमकर संक्रांति पर सूर्य उपासना से कौन से रोग दूर होते हैं?भविष्य पुराण: सूर्य उपासना से दूर होने वाले रोग — कुष्ठ रोग, नेत्र विकार और हृदय रोग। भगवान सूर्य: आरोग्य, मेधा, यश और दीर्घायु प्रदान करते हैं। प्रमाण: साम्ब ने 12 वर्ष सूर्य उपासना से कुष्ठ रोग मुक्ति पाई।#सूर्य उपासना रोग#कुष्ठ रोग#नेत्र विकार
सूर्य अर्घ्य'ॐ खखोल्खाय स्वाहा' मंत्र का क्या महत्व है?भविष्य पुराण: श्रीकृष्ण ने पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए 'ॐ खखोल्खाय स्वाहा' मंत्र दिया। साम्ब ने 12 वर्ष चंद्रभागा नदी तट पर तपस्या कर रोग मुक्ति पाई। अर्घ्य देते समय दोनों हथेलियों से जल अर्पण करते हुए मानसिक जप।#खखोल्खाय स्वाहा#भविष्य पुराण#साम्ब
रोग निवारणकुष्ठ रोग के लिए महेश्वर कवचम् का क्या महत्व है?महेश्वर कवचम् में कुष्ठ, पामा, विचर्चिका (त्वचा रोग) का उल्लेख है — यह रक्तगत और त्वचीय दोषों का शोधन करके रोग की जड़ को शुद्ध करता है।#कुष्ठ रोग#त्वचा रोग#रक्तगत दोष
पौराणिक कथाभगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को इस व्रत से क्या फायदा हुआ था?भगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को एक ऋषि के श्राप के कारण 'कुष्ठ रोग' (कोढ़) हो गया था। रथ सप्तमी के दिन सूर्य की विशेष पूजा करने से उसका यह रोग पूरी तरह ठीक हो गया था।#साम्ब#कुष्ठ रोग#श्रीकृष्ण
व्रत कथाराजा कुबेर ने हेममाली को कुष्ठ रोग का श्राप क्यों दिया था?काम-वासना के कारण शिव जी की पूजा में बाधा डालने पर क्रोधित राजा कुबेर ने हेममाली को स्वर्ग से निकालकर पृथ्वी पर 18 प्रकार के भयंकर कुष्ठ (कोढ़) रोग भुगतने का श्राप दे दिया था।#कुबेर का श्राप#कुष्ठ रोग#कर्तव्य लापरवाही