समुद्र मंथन: वासुकि कृतज्ञतावश गले में ('नागेन्द्रहाराय')। प्रतीक: भय पर विजय (सर्प = भय, आभूषण बना), कुंडलिनी शक्ति (विशुद्धि चक्र), मृत्यु पर नियंत्रण (महामृत्युंजय), अहंकार दमन, पशुपतित्व (सभी प्राणियों के स्वामी)।
स्रोत प्रश्न: शिव के गले में नाग धारण करने का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है? →