मंगलवार, 31 मार्च 2026
नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में आकाश में चंद्रमा के पथ (भचक्र) को 27 बराबर भागों में बाँटकर बनाया गया तारा-समूह है। प्रत्येक नक्षत्र 13 अंश 20 कला (13°20′) का होता है और 4 पादों में विभाजित है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिनों में पूरे भचक्र का चक्कर लगाता है।
प्रत्येक नक्षत्र का एक स्वामी ग्रह और एक अधिष्ठाता देवता होता है। नक्षत्र के आधार पर ही जन्म कुंडली का चंद्र राशि, दशा क्रम और नामाक्षर निर्धारित होते हैं। पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है (विवाह को छोड़कर)।
एक राशि 30° की होती है और उसमें 2.25 नक्षत्र आते हैं। नक्षत्र 13°20' का होता है। राशि सूर्य पर आधारित है, नक्षत्र चंद्रमा पर।
पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है — यह लगभग सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम है (विवाह को छोड़कर)।
आज पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र है — शुभ — विवाह, प्रेम, कला।