शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अथर्वशीर्ष गणेश गायत्री
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगायत्री मंत्र
स्वरूपएकदंत
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम एकदंत को जानते हैं, वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वह दन्ती हमें सद्मार्ग पर प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विद्या, उच्च शिक्षा में सफलता और मानसिक तीक्ष्णता
विस्तृत लाभ
विद्या, उच्च शिक्षा में सफलता और मानसिक तीक्ष्णता।
जप काल
प्रातःकाल, स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से 108 बार।
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