शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ संकर्षणाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारद्वितीय व्यूह मंत्र
स्वरूपज्ञान और बल के अधिपति (बलराम रूप)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं ज्ञान और बल के प्रतीक संकर्षण को प्रणाम करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन शक्ति (जीव) पर नियंत्रण और अज्ञान का नाश
विस्तृत लाभ
जीवन शक्ति (जीव) पर नियंत्रण और अज्ञान का नाश 39।
जप काल
ज्ञान और मानसिक बल की वृद्धि हेतु।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
ॐ मध्यं पातु हिरण्याक्ष-वक्षःकुक्षिविदारणः
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8
ॐ सुभाषिण्यै नमः
ॐ सत्यवाचे नमः
ॐ क्षोभणाय नमः।