शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ निर्गुणाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनिर्गुण ब्रह्म
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो त्रिगुणमयी माया (सत्त्व, रज, तम) के गुणों से पूर्णतः परे हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मायातीत अवस्था
02
सांसारिक आकर्षणों से निर्लिप्त रहकर जीवन जीने की कला
विस्तृत लाभ
मायातीत अवस्था; सांसारिक आकर्षणों से निर्लिप्त रहकर जीवन जीने की कला।
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ॐ वरेण्याय नमः
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ यदूद्वहाय नमः