शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ द्युतिमते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपकांतिमय
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका शरीर दिव्य तेज और कांति से प्रकाशित रहता है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आभा विकास
विस्तृत लाभ
आभा विकास
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥
ॐ अग्नाविष्णू सजोषसेमा वर्धन्तु वां गिरः। द्युम्नैर्वाजेभिरागतम्॥
ॐ श्रीकृष्णाङ्गप्रियङ्कर्यै नमः
वेदान्तार्थस्वरूपाय वेदान्तार्थविधायिने । वेदान्तार्थविदे नित्यं विदिताय नमो नमः ॥
ॐ मङ्गलाय-परमाय नमः
ॐ श्रीवत्साङ्काय नमः