महोग्र नरसिंह दिग्बंधन मंत्र
ॐ नमो भगवते महोग्र दिग्बन्धन नरसिंहाय ज्वालामुखाय अग्निनेत्राय... हन हन दह दह पच पच बन्ध बन्ध कील कील स्वाहा
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे महोग्र दिग्बंधन नरसिंह, जिनके मुख और नेत्र अग्नि के समान हैं... मेरे शत्रुओं का हनन करें, उन्हें भस्म करें, सभी दिशाओं को मेरे लिए बांधें और कीलित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी दसों दिशाओं से नकारात्मक शक्तियों (पर-तंत्र, पर-यंत्र, भूत-प्रेत) को कीलित करना
विस्तृत लाभ
सभी दसों दिशाओं से नकारात्मक शक्तियों (पर-तंत्र, पर-यंत्र, भूत-प्रेत) को कीलित करना।
जप काल
किसी भी बड़ी साधना से पूर्व दिशा-बंधन हेतु तांत्रिक प्रयोग।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अन्तःकरणवासिन्यै नमः
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्। विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥ 18
ॐ प्रद्युम्नाय नमः
ॐ मेधा देवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना। त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान बृहद्वदेम विदथे सुवीराः॥
ॐ डामराय नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ओङ्कारः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः