शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ रुक्मिण्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अद्वैत रूप से द्वारकाधीश की रानी रुक्मिणी भी हैं।
जप काल
तुलसी माला पर जप।
टिप्पणी
साधना की दृष्टि से इन नामों को ॐ और 'नमः' या 'स्वाहा' के सम्पुट के साथ जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
ॐ मूलाधारनिवासिने नमः
ॐ कामदाय नमः
ॐ भक्तसाम्राज्यभोगदाय नमः
ॐ बलभद्राय नमः
मया सो अन्नमत्ति यो विपश्यति यः प्राणिति य ईं शृणोत्युक्तम्। अमन्तवो मां त उप क्षियन्ति श्रुधि श्रुत श्रद्धिवं ते वदामि॥