शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ विशारदाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपरम विद्वान
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो वेदों, शास्त्रों और कलाओं के परम विशारद (पंडित) हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विद्या
विस्तृत लाभ
विद्या
जप काल
अध्ययन
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महासेनाय धीमहि तन्नः षण्मुखः प्रचोदयात्
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की
ॐ बल्लाळेश्वराय नमः
उदीच्यां भीषण भैरवाय नमः उदीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥