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विस्तृत उत्तर
श्राद्ध में पिण्ड पके हुए चावल, जौ, गोदुग्ध, गोघृत, शक्कर, शहद और तिल को मिलाकर बनाया जाता है। यह पिण्ड स्थूल शरीर का प्रतीक माना गया है। पिण्डदान के माध्यम से मृत आत्मा को नवीन सूक्ष्म शरीर की प्राप्ति का आधार मिलता है और सपिण्डीकरण में यही अन्न ऊर्जा बनकर पितरों को पुष्ट करता है।
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