अद्वैत वेदांत के अनुसार आत्मा और ब्रह्म एक कैसे?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
शंकराचार्य: 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः।' आत्मा ब्रह्म ही है — अज्ञान (माया) के कारण भेद दिखता है। घड़े का आकाश = महाआकाश, लहर = समुद्र। चारों महावाक्य यही कहते हैं। अज्ञान हटना ही मोक्ष है।
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