का सरल उत्तर
महाभारत, अनुशासन पर्व 115.23 — 'अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥' अर्थ: अहिंसा परम धर्म, परम तप और परम सत्य है। 'धर्म हिंसा तथैव च' वाला अर्धश्लोक प्रामाणिक महाभारत में उपलब्ध नहीं है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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